१) ख्वाहिशें जहन में उनकी तबाही हमारी रखते हैं, हम भी बेखबर नहीं साज़िशों से उनकी, हवा के हर रुख की खबर रखते हैं.
२) उस सुबह की रोशनी में वे रोशन रहा करते हैं, और इस ढलती शाम में उनकी रंगत ही उड़ जाती हैं.
३) रोशनी तो थी नहीं उन्होंने अंधेरे में मेरा चित्र देख लिया, दृष्टि दोष था या विचित्र दृष्टिकोण, उस चित्र से मेरा चरित्र देख लिया
4) तेरी बाहों के शुकू में फिक्र मेरी तबाह हो गई हैं,
धड़कन ही बढ़ी नहीं हैं, सांसे भी मेरी जवां हो गई है।
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